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Moral Stories in Hindi for Kids (Short) – Top 10

Moral Stories in Hindi

Short moral stories in hindi for kids is a very good medium to make the children understand about good and bad deeds. Also it is a fun learning activity along with life learning lessons. Therefore, every parent must ensure that good morals are seeded in child’s life in early age. Hence, short moral Stories in hindi for kids play a vital role in such development. Here you will find top 10 stories which will help you in the same.

Moral Stories in Hindi:

Short moral stories in hindi for kids are for those who are comfortable to understand them in the Hindi language. Therefore, this hindi translation of the stories is provided in this article. Also, i hope you shall read it loud to your kid and make it a fun activity. So let us start with our stories now.

1) Short Moral Stories in Hindi for kids – हाथी क्यों हारा

एक बार एक व्यक्ति, एक हाथी को रस्सी से बांध कर ले जा रहा था | एक दूसरा व्यक्ति इसे देख रहा था | उसे बढ़ा आश्चर्य हुआ की इतना बढ़ जानवर इस हलकी से रस्सी से बंधा जा रहा है दूसरे व्यक्ति ने हाथी के मालिक से पूछा ” यह कैसे संभव है की इतना बढ़ा जानवर एक हलकी सी रस्सी को नहीं तोड़ पा रहा और तुम्हरे पीछे पीछे चल रहा है|

हाथी के मालिक ने बताया जब ये हाथी छोटे होते हैं तो इन्हें रस्सी से बांध दिया जाता है उस समय यह कोशिश करते है रस्सी तोड़ने की पर उसे तोड़ नहीं पाते | बार बार कोशिश करने पर भी यह उस रस्सी को नहीं तोड़ पाते तो हाथी सोच लेते है की वह इस रस्सी को नही तोड़ सकते और बढे होने पर कोशिश करना ही छोड़ देते है. (Moral Stories in Hindi for kids) * (Short Moral Stories in Hindi)

Moral :

दोस्तों हम भी ऐसी बहुत सी नकारात्मक बातें अपने दिमाग में बैठा लेते हैं की हम नहीं कर सकते | और एक ऐसी ही रस्सी से अपने को बांध लेते हैं जो सच में होती ही नहीं है

2) Moral Stories in Hindi for Kidsलालच का फल

किसी गांव में एक किसान रहता था. रात-दिन मेहनत कर वह खुब पैसा कमाना चाहता था लेकिन था लालची व कंजूस इसलिए खर्च कुछ भी नहीं करता था, जब भी उसका मांसाहार खाने का मन करता वह जंगल से कोई जीव मार लाता और पका कर खा लेता.

एक दिन वह जंगल से एक सुनहरी मूर्गी को पकड़ कर घर ले आया. उसकी पत्नी मूर्गी देखकर बेहद खुश हुई क्योंकि पति की तरह ही वह भी लालची थी. वह तुरन्त ही चाकू लेकर मूर्गी को हलाल करने बैठ गई. इससे पहले की वह मूर्गी की गर्दन पर चाकू चला पाती मूर्गी ने कहा – मुझे मत मारो मैं तुम्हें मालामाल कर दूंगी. मूर्गी को इंसानी भाषा में बोलते देखकर किसान की पत्नी डर गई और उसने चिल्लाकर अपने पति को बुलाया. सुनो जी,, यह तो कोई मायावी मुर्गी हैं, यह तो हमारी तरह बोलती है, क्या कहा भगवान ? किसान चोंक पडा, मनुष्य की तरह बोलती है ? हां यह कहती हैं कि “हमें मालामाल कर देगी”. ला मैं इसे काटू शायद यह अपनी जान बचाने के लिए ऐसा कर रही है.

जैसे ही किसान मुर्गी को काटने चला वैसे ही मुर्गी ने फिर से कहा – अरे ओ मूर्ख किसान! मेरी बात सुन मूर्गी ने हिम्मत बटोर कर कहा – मेरी जान बक्श दें मैं तुझे मालामाल कर दूंगी. यह सुनकर किसान बोला – अच्छा भला तु मुझे मालामाल कैसे करेगी ? तू क्या मुझे मूर्ख समझती हैं ? “किसान को मुर्गी की बात सुनकर लालच आ गया था”

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तब मूर्गी बोली – मैं रोजाना तुझे एक सोने का अंडा दूंगी, सोने का अंडा मुर्गी की बात सुनकर किसान के मूंह में पानी आ गया. उसने अपनी पत्नी की तरफ देखा. क्या पता यह मूर्गी सच कह रही हो एक बार आजमाने मे हर्ज ही क्या है ? अगर बात झुठ निकली तो हलाल तो इसे हम कल भी कर सकते हैं.

किसान को पत्नी की बात जंच गई. उसने मूर्गी को एक बढिया दडबे में रखा और अच्छा दाना पानी किया. दूसरे दिन पति-पत्नी ने जैसे ही मूर्गी का दडबा खोला तो यह देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ कि दडबे में सोने का एक अंडा पडा था.

किसान ने उसे लपक लिया, फिर तो रोज ही ऐसा होने लगा, मूर्गी रोज एक सोने का अंडा देती. कुछ ही दिनों में किसान मालामाल हो गया उसने कच्चे मकान की जगह पककी हवेली बनवा ली, खेतों की देखभाल के लिए नोकर – चाकर रख लिए, कहीं आने-जाने के लिए एक घोडा-बग्गी खरीद ली.

मगर इतना सब होने पर भी किसान की तृष्णा नहीं मिटी वह चाहता था कि उसके पास और अधिक धन हो क्योंकि वह अभी गांव के जमींदार के बराबर अमीर नहीं हुआ था. जैसे-जैसे वह अमीर होता जा रहा था उसका लालच भी बडता ही जा रहा था.

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कभी-कभी वह सोचता कि काश उसकी सुनहरी मूर्गी दो अंडे रोज दे तो वह जल्दी मालामाल हो जायेगा. एक बार उसने सोचा कि शायद मूर्गी के पेट में अंडे ही अंडे भरे पडे हैं मगर यह दुष्ट मूर्गी मुझे केवल एक ही अंडा देती हैं अगर मैं इसका पेट फाडकर सारे अंडे एक साथ निकाल लू तो क्या बुराई है.

ऐसा सोचकर उस लालची किसान ने एक छुूरी उठाई और जाकर मुर्गी को पकड लिया मुर्गी बहुत गिडगिडाई और उसे समझाया कि किसान तुम ज्यादा लालच मत करो अगर लालच में आकर मुझे मार दोगे तो एक अंडे से भी हाथ धो बैठोगे. मगर किसान का तो खयाल था कि मूर्गी उसे बेवकफूफ बना रही हैं इसलिए उसने उसकी एक नहीं सुनी और उसका पेट फाड दिया. मूर्गी मर गई और एक भी अंडा नहीं निकला अब तो किसान हाथ मलता रह गया. (Moral Stories in Hindi for kids)

Moral:

लालच करने से इंसान की जिंदगी लूट जाती है, और बहुत से लोगों की लूटी भी है. लालच और तृष्णा दोनों ही ऐसी चीजें है जिनका कोई अंत नहीं लेकिन! इनको पूरा करते-करते इंसान का जरूर अंत हो जाता हैं. इसलिए हमेशा लालच से बचो, और अपनी बुद्धि से काम लो.

3) Moral Stories in Hindi for Kidsदो मुंह वाली चिड़िया

नंदन वन में एक नन्हीं चिड़िया रहती थी जिसके दो मुँह थे। दो मुँह होने के कारण वह चिड़िया दूसरे पछियों से बिल्कुल विचित्र दिखती थी। वह चिड़िया एक बरगद के पेड़ पर घौंसला बना कर रहती थी। एक दिन वह चिड़िया जंगल में भोजन की तलाश में इधर उधर उड़ रही थी। अचानक चिड़िया के दायें वाले मुँह की नजर एक लाल फल पर पड़ी। देखते ही उसके मुँह में पानी आ गया और वह तेजी से वो लाल फल खाने को आगे बढ़ी।

अब चिड़िया का दायाँ मुँह बड़े स्वाद से वो फल खा रहा था। बायाँ मुँह बेचारा बार बार दाएं मुंह की तरफ देख रहा था कि ये मुझे भी खाने को दे लेकिन दायाँ वाला चुपचाप मस्ती से फल खाये जा रहा था। अब बाएँ मुँह ने दाएँ वाले से प्रार्थना की, कि थोड़ा सा फल खाने को मुझे भी दे दो तो इसपर दाएं मुंह ने गुस्सा दिखाते हुए कहा – कि हम दोनों का पेट एक ही है। अगर मैं खाऊँगा तो वो हमारे पेट में ही जायेगा। लेकिन उसने बाएं वाले को कुछ खाने को नहीं दिया।

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अगले दिन चिड़िया फिर से जंगल में खाने की तलाश में उड़ रही थी। तभी बाएं मुँह की नजर एक अदभुत फल पर पड़ी जो बहुत चमकीला था। वह तेजी से उस फल की तरफ लपका। अब जैसे ही वो फल खाने को हुआ तुरंत पास बैठे एक कौए ने चेतावनी दी कि इस फल को मत खाओ ये बहुत जहरीला है।

ये सुनकर दायाँ मुंह भी चौंका और बाएं से प्रार्थना की कि इस फल को मत खाओ ये हमारे लिए बहुत खतरनाक साबित होगा लेकिन बाएं मुंह को तो दाएं से बदला लेना था। उसने एक ना सुनी और चुपचाप वह फल खाने लगा। कुछ ही देर में चिड़िया का शरीर मृत होकर जमीन पर गिर पड़ा। (Short Moral Stories in Hindi)

Moral:

एक दूसरे से मिल जुल कर रहें क्योंकि अगर परिवार का एक भी सदस्य गलत काम करे तो नुकसान पूरे परिवार का होता है। यही इस कहानी की शिक्षा है।

4) Moral Stories in Hindi for Kidsप्यासा कौआ

गर्मियों के दिन थे। एक कौआ बहुत ही प्यासा था । प्यास की वजह से उसका गला सूख रहा था।
वह पानी की तलाश में इधर – उधर उड़ता रहा लेकिन उस पानी कहीं पर भी नहीं मिला। सभी जलाशय गर्मी के वजह से सुख चुके थे। अंत में कौए को एक जगह पर एक घड़ा रखा हुआ दिखाई दिया। वह घड़े के पास गया और उस घड़े में झांक कर देखा। उस घड़े में थोड़ा पानी था लेकिन पानी काम होने की वजह से उस कौए की चोंच पानी तक नहीं पहुंच पा रही थी।

उसमे बहुत कोशिश की लेकिन पानी काम होने की वजह से उसकी चोंच उस पानी तक नहीं पहुंच पा रही थी। अचानक से उसे एक उपाय सूझा। वहां पर कुछ कंकड़ पड़े हुए थे । कौआ वहां से उन कंकड़ों को उठाकर उस घड़े में डालने लगा। जैसे जैसे वह उस घड़े में कंकड़ डाल रहा था वैसे वैसे पानी उपर की तरफ की आता जा रहा था। कौए ने उस में जब तक कंकड़ डाले जब तक की उसकी चोंच पानी तक नहीं पहुंच गई। उसके बाद उस कौवे ने पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई के कांव – कांव कर के उड़ गया। (Short Moral Stories in Hindi)

Moral:

जहां पर चाह होती है। वहां पर रह होती है।

5) Short Moral Stories in Hindi for Kidsअंगूर खट्टे है

एक दिन एक भूखी लोमड़ी एक अंगूर के बागीचे में जा पहुंची। वहां पर बेलों में अंगूरों के पके हुए गुच्छे लटक रहे थे. यह देखकर लोमड़ी के मुंह में पानी आ गया. और उसने मुंह उपर की तरफ कर के अंगूर को पाने की कोशिश की लेकिन वह सफल ना हो सकी।

अंगूर बहुत ऊंचाई पर थे इसलिए वह बहुत उचली लोमड़ी ने बहुत कोशिश की लेकिन अंगूर बहुत ऊंचाई पर थे वह जब तक उछलती रही जब तक कि वह पूरी तरह से थक नहीं गई.

और थक कर उसमे उम्मीद छोड़ दी और अंगूर खट्टे है. यह कहकर वह लोमड़ी वहां से चली गई। (Moral Stories in Hindi for kids)

Moral:

हार मानने में हर्ज क्या है ?

6) खरगोश और कछुआ

कछुआ बहुत ही धीरे चलता है. और उसकी चाल की वजह से खरगोश उस पर बहुत ही हंसता था. एक दिन खरगोश ने उस कछुए को रेस के लिए चुनौती दी. कछुए ने उसकी चुनौती स्वीकार कर ली। रेस हुई. खरगोश तेजी से भागा और काफी आगे जाने पर पीछे मुड़ कर देखा, कछुआ कहीं आता नज़र नहीं आया.

उसने मन ही मन सोचा कछुए को तो यहां तक आने में बहुत समय लगेगा, चलो थोड़ी देर आराम कर लेते हैं. और वह एक पेड़ के नीचे लेट गया. लेटे-लेटे कब उसकी आंख लग गई पता ही नहीं चला. उधर कछुआ धीरे-धीरे मगर लगातार चलता रहा.

बहुत देर बाद जब खरगोश की आंख खुली तो कछुआ लक्ष्य तक पहुंचने वाला था. खरगोश तेजी से भागा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और कछुआ रेस जीत गया. (Short Moral Stories in Hindi)

Moral:

धैर्य और लगन से काम करने वाला हमेशा विजयी होता है।

7) चालाक लोमड़ी

एक दिन एक कौवे ने एक बच्चे के हाथ में से रोटी छीन ली। उसके बाद वह पेड़ की ऊंची डाल पर जा बैठा और रोटी खाने लगा। उसको रोटी खाते हुए एक लोमड़ी ने देख लिया। और वह भी उस पेड़ के नीचे जा पहुंची और कौए से कहा नमस्ते कौए राजा आप ठीक तो हो। कौवे कोई जवाब नहीं दिया।

लोमड़ी ने उससे कहा कौवे राजा आप बहुत ही सुन्दर और चमकदार लगा रहे हो। अगर आपको आवाज़ भी अच्छी होगी तो आप सारे पक्षिओ के रहा बन जाओगे। कौवे ने सोचा मैं सच में राजा बन जाऊंगा उसने जैसे ही बोलने के लिए मुंह खोला रोटी उसकी चोंच में से गिर गई। और लोमड़ी उस रोटी को उठाकर भाग गयी। (Short Moral Stories in Hindi)

Moral:

अगर कोई झूठी तारीफ करे तो उसकी बातों में नहीं आना चाहिए।

8) आदमी की कीमत

राजा तैमूरलंग की क्रूरता से उसकी प्रजा बहुत परेशान थी| उसने ना जाने कितने देशों को रौंद डाला था और न जाने कितने लोगों के घर उजाड़ दिए थे| तैमूरलंग के सामने एक बार बंदियों को लाया गया| उन बंदियों में तुर्किस्तान का एक प्रसिद्ध कवि अहमद भी था| अहमद को देखकर तैमूर ने दो गुलामों की ओर इशारा करते हुए कहा, मैंने सुना है कि कवि बहुत पारखी होते हैं| अगर ऐसा है तो एक बात बताओ कि इन दोनों गुलामों की क्या कीमत होगी?

अहमद थोड़ी देर तो चुप रहा लेकिन फिर उसने कहा, इन दोनों में से कोई भी 400 अशर्फियों से कम कीमत का नहीं है| यह सुनकर तैमूरलंग को बहुत आश्चर्य हुआ उसने तत्काल ही दूसरा प्रश्न क्या| अच्छा तुम यह बताओ कि मेरी क्या कीमत होगी? उसे लगा कि अहमद या तो डर के मारे चुप हो गया है या उसकी अधिक से अधिक कीमत के लिए सोच रहा है| लेकिन कवि होने के बावजूद अहमद स्पष्टवादी था| उसने जवाब दिया, आप की कीमत सिर्फ 24 अशर्फियां हैं| तैमूर को बहुत क्रोध आया और आश्चर्य भी हुआ उसने कहा, क्या बकते हो?

इतना मूल्य तो मेरे जूतों का है| अहमद ने कहा जी हां, मैंने आप के जूते की ही कीमत बताई है| तैमूर लंग ने गुस्से में कहा, इसका मतलब मेरी कोई कीमत नहीं है|अहमद ने कहा जी नहीं,जिस व्यक्ति में दया नाम की कोई चीज नहीं हो, भला ऐसे व्यक्ति को मनुष्य की संज्ञा कैसे दी जा सकती है|तैमूर लंग ने उस अहमद को पागल करार देकर कारागार में डलवा दिया|(Moral Stories in Hindi for kids) – (Short Moral Stories in Hindi)

Moral:

आदमी की कीमत उसके अच्छे कामों और व्यवहार से होती है। इस लिए हमेशा अच्छे काम करे।

9) सत्य का फल

एक बार विकास नगर के राजा भानु प्रताप के मन में एक बात आई. वह जानना चाहते थे कि जो लोग किसी न किसी अपराध के कारण दंडित किए जाते हैं, उनमें सचमुच कोई पश्चाताप की भावना आती है या नहीं. दूसरे दिन वह राजा अचानक अपने राज्य के बंदी गृह में पहुंच गया और सभी कैदियों से उनके द्वारा किए गए अपराध के बारे में पूछने लगा कि किस कारण से उन्होंने अपराध किया और यहां बंदी ग्रह में कैद हैं.

एक कैदी ने कहा:-” राजन! मैंने कोई अपराध नहीं किया है| मैं निर्दोष हूं|” दूसरा बंदी बोला:-” महाराज! मुझे फंसाया गया है. मैं भी निर्दोष हूं”. इसी तरह सभी बंदी अपने आप को निर्दोष साबित करने लगे. फिर राजा ने अचानक देखा कि एक व्यक्ति सिर नीचे किए हुए आंसू बहा रहा था. राजा ने उसके पास जाकर पूछा कि तुम क्यों रो रहे हो? उस व्यक्ति ने बड़ी विनम्रता से कहा:-” हे राजन! मैंने गरीबी से तंग आकर चोरी की थी. मुझे आपके न्याय पर कोई शक नहीं है. मैंने अपराध किया था, जिसका मुझे दंड मिला.”

राजा ने सोचा कि दंड का विधान सभी के अंदर प्रायश्चित का भाव पैदा नहीं करता है. लेकिन उन सभी कैदियों में से एक यही ऐसा व्यक्ति है जो अपनी गलती का प्रायश्चित कर रहा है. यदि इस व्यक्ति को दंड से मुक्त किया जाए तो यह अपने अंदर सुधार कर सकता है. इसलिए राजा ने उसे मुक्त कर दिया.(Moral Stories in Hindi for kids) * (Short Moral Stories in Hindi)

Moral:

हमेशा सच बोलना चाहिए और सत्य का साथ देना चाहिए|

10) हंस और मेंढक

एक बार एक हंस एक समुद्र से उड़कर दूसरे समुद्र की ओर जा रहा था| वह रास्ते में थक कर एक कुएं के किनारे बैठ गया| उस कुएं के अंदर एक मेंढक रहता था|उस मेंढक ने हंस को देखकर पूछा:-” भाई! तुम कौन हो और कहां से आए हो?”

हंस ने जवाब दिया:-” मैं समुद्र के किनारे रहने वाला एक पक्षी हूं और मोती चुनकर खाता हूं|”. तब मेंढक ने पूछा कि समुद्र कितना बड़ा है? * हंस ने कहा:- ‘बहुत बड़ा है|’ मेंढक ने थोड़ी दूर पीछे हट कर कहा कि इतना बड़ा होगा? हंस ने कहा:-” नहीं, बहुत बड़ा|” मेंढक ने थोड़ा सा चक्कर लगाकर पूछा:-‘ इतना बड़ा?’. * हंस ने कहा कि समुद्र इससे भी कहीं बड़ा होता है. तब मेंढक बोला:-” तू झूठा है, बेईमान है. इससे बड़ा तो हो ही नहीं सकता.”

हंस ने सोचा कि इस मुर्ख को समझाने से अच्छा है कि यहां से प्रस्थान किया जाए और हंस वहां से अपने मार्ग की ओर चल दिया|

Moral:

जो बात हमारी समझ से बाहर होती है उसको हम अक्सर मानने के लिए तैयार नहीं होते हैं. (Moral Stories in Hindi for kids) / (Short Moral Stories in Hindi)